बलिया मे अधिवक्ताओं ने यूजीसी के खिलाफ निकाला जुलुस, सीएम योगी को पत्र भेजकर की इस क़ानून को वापस करने की मांग
बलिया।। सैकड़ो की संख्या मे सिविल कोर्ट से कलेक्ट्रेट पहुँचे अधिवक्ताओं मे यूजीसी के द्वारा लागू किये गये क़ानून को लेकर काफ़ी आक्रोश देखने को मिला। इनका कहना था कि बिना अपराध किये ही सामान्य वर्ग के छात्र छात्राओं को अपराधी वर्ग मे शामिल करने वाला क़ानून संवैधानिक अधिकारों का हनन करने वाला, शिक्षा के मंदिरों मे जातीय संघर्ष को बढ़ाने वाला और सामान्य वर्ग के छात्र छात्राओं को अपराधी बनाने वाला दुर्भावना से प्रेरित है। झूठी शिकायतकर्ताओ के खिलाफ कार्यवाही नही करने का नियम सबसे बड़ा आक्रोश का कारण बना है। दूसरा कारण ऐसी शिकायतों की जांच के लिये बनी समिति मे सामान्य वर्ग का एक भी सदस्य न होना भी है। इसको लेकर सैकड़ो अधिवक्ता यूजीसी और केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मुख्यमंत्री के नाम का पत्रक जिलाधिकारी के प्रतिनिधि को सौपा। उस पत्रक मे सीएम योगी से निम्न मांग की गयी है.....
विश्व विद्यालय अनुदान आयोग (यू०जी०सी०) द्वारा आक्रोश का कारण 13 जनवरी 2026 को अधिसुचित प्रमोशन आफ इक्वीटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन रेगुलेशन 2026 का निर्माण कर हिन्दू धर्म की एकता को विखण्डित कर सामान्य वर्ग के छात्रों को सम्भावित अपराधी उद्घोषित कर सामान्य वर्ग के छात्रों के उत्पीड़न के लिए यू०जी०सी० द्वारा कानून निर्मित किया गया है। उसी दुर्भावना के तहत उपरोक्त ड्राफ्ट में झूठी शिकायतोंआ पर सजा के प्रावधान को समाप्त कर सामान्य वर्ग को जन्मजात अपराधी उद्घोषित करके बच्चों के भविष्य से खिलवाड कर पूरे हिन्दू समाज में विद्यालय परिवेश से ही आपसी वैमनस्यता को बढ़ावा देने का कार्य उपरोक्त यू०जी०सी० के नियम बनने से हुआ है। उक्त यू०जी०सी० के नियम दुर्भावना के तहत अपने राजनीतिक व्यक्तिगत स्वार्थ से उत्प्रेरित होकर सनातन हिन्दू धर्म को विखण्डित करने के लिए बनाया गया है। यू०जी०सी०के इस नियम को देखने के बाद यही प्रतीत होता है कि सामान्य वर्ग को शुरू से ही अपराधी घोषित करने का प्रयास किया गया है जिसका पूर्ण जोर विरोध समस्त सनातन संस्कृति को मानने वाले सभी लोगों के साथ मिलकर सामान्य प्रवर्ग करता है। इस यू०जी०सी० के नियमों को पुर्नविचार कर सर्व समाज को ध्यान में रखते हुए बदलाव जरूरी है जिससे सर्व समाज सुरक्षित महसुस करें।



