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देवरिया जनपद के पिपराभूली गांव के निवासियों की पीएम से गुहार , इधर भी देखिये ,हम भी है भारत के नागरिक सरकार ! जल भराव के चलते नारकीय जीवन जीने को मजबूर इस गांव के लोग


 देवरिया जनपद के पिपराभूली गांव के निवासियों की पीएम से गुहार , इधर भी देखिये ,हम भी है भारत के नागरिक सरकार ! जल भराव के चलते नारकीय जीवन जीने पर मजबूर इस गांव के लोग
कुलदीपक पाठक



देवरिया 8 जुलाई 2019 ।।जनपद के भागलपुर विकासखंड के अंतर्गत एक गांव है पिपराभूली ,जो आज भी विकास से कोसों दूर है। बरसात के मौसम में यहां सड़कें जलमग्न हो जाती हैं आने जाने के लिए लोग लोग गंदे पानी के पीछे गुजरते हैं और कई बीमारियों का शिकार हो जाते हैं ।ऐसे में भाजपा सरकार
एक तरफ गांवो को सड़क योजनाओं से जोड़ने की बात करती है , हर गांव को सड़क बिजली पानी की व्यवस्था देने की बात करती है लेकिन इस गांव में मूलभूत सुविधाओं के नाम पर मात्र एक सड़क है जो मेन रोड स गांव की तरफ जाती है लेकिन गांव के अंदर का नजारा कुछ और ही है । थोड़ी बारिश में ही लोग गंदे पानी से भरे रास्ते के द्वारा अपने घरो में जाने के लिए मजबूर हैं। बरसात के मौसम में सर्प और अन्य कीड़े मकोड़ों के काटने का डर हमेशा बना रहता है लेकिन क्या करें दिन भर कहीं और रहे लेकिन शाम को तो घर जाना लोगों की मजबूरी होती है। खासकर बरसात में हल्की बारिश में ही रास्ते जलमग्न हो जाते हैं और इस गांव की आधी आबादी का आवागमन बाधित होने के कारण लोग त्रस्त हो जाते है।
इस बारे में जब गांव के लोगों से पूछा गया तो लोग कुछ कहना ही नहीं चाहते थे। उनका कहना था साहब कई बार हम लोग अपने जनप्रतिनिधि और प्रधान को इसके बारे में अवगत करा चुके हैं लेकिन कोई इस पर ध्यान नहीं देता है और ना ही इस पर किसी जिम्मेदार को नजर डालने के लिए कहता है।
आइए जानते हैं गांव के लोगों का क्या कहना है

गांव के युवा संजीव मिश्रा का का कहना है कि हम लोगों ने इस सड़क के निर्माण के लिए कई लोगों से मिले लेकिन सभी बातें हवा-हवाई ही रहे सब अपने मतलब के हैं कोई इस पर ध्यान नहीं देता है।

प्रणव कुमार का कहना है कि चुनाव में नेता तो आते हैं लोग वादे भी करते हैं लेकिन बाद में जाने पर पहचानते भी नहीं है और अपने वादे से मुकर जाते हैं हम लोग जाएं तो कहां जाएं बरसात के मोसम मे आने जाने में काफी परेशानी होती है वहीं हमारी गाड़ियां दूसरे के द्वार दरवाजे पर खड़ी करनी पड़ती है। कभी-कभी तो और कोई गाड़ी लेकर घर से गुजरता है तो हमेशा चल कर गिरने का और डर बना रहता है।

छात्र अनूप मिश्रा का कहना है कि हमें हमेशा कॉलेज जाने के लिए समस्या होती है। लेकिन इस बात पर कोई ध्यान नहीं देता है।

वहीं जयराम यादव का कहना है कि आए दिन लोग फिसल कर देते हैं बच्चे स्कूल नहीं जा पाते हैं गोद में उठाकर ले जाना पड़ता है वहीं इस पानी भरे गड्ढे के बगल में एक दिव्यांग भी निवास करते हैं जिन्हें कंधे पर बिठा कर ले जाना पड़ता है ।
इस बाबत जब ग्राम प्रधान उषा देवी से बात की गई तो उनका कहना है कि लेखपाल से बात की गई है जल्द ही नापी कराकर रास्ते का निर्माण कराया जाएगा।

 देखना अब यह है कि इस समस्या से पिपरा भूली गांव को कब निजात मिलती है।