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बलिया में ट्रेनिंग के नाम पर सरकारी धन के लूट का पर्दाफाश : "आउट कम लर्निंग" की ट्रेनिंग यानी घोटालो की ट्रेनिंग :उपस्थिति घोटाला ,खाने में घोटाला ,सबसे बड़ा ट्रेनिंग घोटाला !

"आउट कम लर्निंग" की ट्रेनिंग यानी घोटालो की ट्रेनिंग :उपस्थिति घोटाला ,खाने में घोटाला ,सबसे बड़ा ट्रेनिंग घोटाला
मधुसूदन सिंह की स्पेशल रिपोर्ट




बलिया 5 अप्रैल 2019 ।। प्रदेश में प्राथमिक शिक्षा के स्तर का उन्नयन करने के लिये , प्राथमिक विद्यालयों के प्रति बच्चो और अभिभावकों की रुचि बढ़े , छात्रों की संख्या बढ़े इसके लिये सरकार सतत प्रयास में लगी हुई है । सरकार इस ट्रेनिंग में आने वाले शिक्षकों को ट्रेनिंग के दौरान घर से दूर भी घर जैसा अहसास रहे , इसके लिये खान पान की अच्छी सुविधा दे रही है । प्रत्येक शिक्षकों को जो ट्रेनिंग के लिये आ रहे है लगभग दो सौ रुपये प्रतिदिन दे रही है और ट्रेनिंग का सत्र उबाऊ न हो इसके लिये इसे मात्र 5 दिनों का ही रखी है । लेकिन इन पांच दिनों की ट्रेनिग को भी जहां ट्रेनिंग लेने वाले अधिकांश अध्यापक पिकनिक समझ रहे हैं वही कुछ ही संख्या में सही इसको उन्नति के लिये जरूरी समझकर पूरे मनोयोग से ट्रेनिंग ले रहे है तो वही इस ट्रेनिंग को सम्पन्न कराने के लिये सरकार से मिले धन से सुविधा देने वाले बीईओ/एसडीआई और एबीआरसी संयुक्त रूप से लोमड़ी की तरह अपना ध्यान धन को लूटने में लगाये हुए है । इस संबंध में जब जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी संतोष कुमार राय से बात की गयी तो उन्होंने ने कहा कि हर ट्रेनिंग सेंटर पर "आल इज वेल " , पर कितना सच है यह हम आपको बताते है और सूरते हाल दिखाते है  । बलिया एक्सप्रेस की टीम तीसरे बीच के ट्रेनिंग के समय डायट पकवाइनार के कैम्पस में स्थित बीआरसी रसड़ा पर चल रही ट्रेनिंग का जायजा लिया । इस ट्रेनिंग सेंटर पर दो कक्षो में दो बैच की ट्रेनिंग चल रही थी पर उपस्थित ट्रेनिंग लेने वालों की आधी भी नही थी । वही इसी बैच की  नगरा बीआरसी पर चल रही ट्रेनिंग में हमारी टीम पहुंची तो ट्रेनर जहां पूरे मनोयोग से ट्रेनिंग दे रहे थे तो वही 90 प्रतिशत एक बैच में संख्या देखी गयी । वही जब इसी सेंटर पर दुबारा हमारी टीम गयी तो चौथे बैच में उपस्थिति 40 प्रतिशत भी नही मिली ।
    हमारी टीम के जाने के बाद एबीआरसी रसड़ा ने जारी किया व्हाट्सअप मैसेज
जिस बीआरसी के एबीआरसी से ट्रेनिंग ले रहे शिक्षकों की संख्या का पूंछने पर सही आंकड़ा न मालूम था , पिछले दो दिनों से कितने अध्यापक ट्रेनिंग लेने के लिये आ रहे है उनके अटेंडेंस दिखाने की बात कहने पर नही दिखाया गया , वी ही एबीआरसी हमारी टीम के लौटने के बाद अपने ग्रुप में मैसेज करके स्वयं ही कह रहे है कि संख्या कम है । ऐसे में क्या ये महानुभाव बताएंगे कि कितने लोग अपने अपने विद्यालयों से ट्रेनिंग के नाम पर छुट्टी लेकर गायब रहे ?
रसड़ा बीआरसी पर कितने लोग और किस अंदाज में ट्रेनिंग ले रहे है यह भी देख लीजिये
ट्रेनिंग में कितने लोग आये थे जिन्होंने खाना खाया था बिखरे हुए पत्तलों को देख कर भी अंदाजा लगा लीजिये --







बीआरसी रसड़ा (पकवाइनार )पर शौचालय की कितनी शानदार व्यवस्था है , आप खुद देखिये









आउट कम लर्निंग का उद्देश्य
अपने पारिवारिक वातावरण से पहली बार बाहर निकल कर स्कूली परिवेश में आये बच्चो से मानसिक स्तर पर  कनेक्ट होकर उनके मन मस्तिष्क में सुरक्षा और पढ़ने के लिये कैसे जिज्ञाषा उतपन्न की जाय , उसी की ट्रेनिंग इस आउट कम लर्निंग के ट्रेनिंग सत्र में दिया जा रहा है । सरकार की मंशा है कि बच्चों में रटने की प्रवृत्ति की जगह समझने की प्रवृत्ति की बढ़ाने का प्रयास किया जाय । इस ट्रेनिंग का मकसद यह भी है कि छोटे बच्चों को पढ़ाने की बजाय अधिकतम सुनाये और उन्ही की भाषा मे उनसे जुड़कर अपने सवालों का समुचित उत्तर देने के लिये प्रेरित किया जाय । इस का महत्वपूर्व उद्देश्य यह है कि बच्चे अपने मां बाप के बाद हमे अपना संरक्षक समझे और हमारी बातों को अनुसरण करके हमारे द्वारा पूंछे गये सवालों का समुचित जबाब दे । ऐसा करते समय अध्यापक को एकाग्रचित होना और सिर्फ और सिर्फ बच्चो से कनेक्ट होना आवश्यक है ।



तीसरे बैच में दोनों जगह ट्रेनिंग का क्या रहा स्तर ?
एक तरफ जहां पकवाइनार के ट्रेनिंग सत्र में प्रशिक्षणार्थियों की संख्या बहुत कम मिली वही नगरा सेंटर पर मन को लुभाने वाली दिखी । एक तरफ जहां नगरा की ट्रेनिंग को देख कर लगा कि सरकार की मंशा के अनुरूप ट्रेनिंग हो रही है तो वही पकवाइनार की ट्रेनिंग को देखने के बाद लगा कि यहां आए शिक्षक और इनके ट्रेनर इसको पिकनिक स्पॉट समझकर मनोरंजन कर रहे है । पकवाइनार पर बच्चे को समझाने के लिये शिक्षकों से पूंछा गया कि अगर एक मुर्गा पेड़ पर चढ़ गया है तो उसे नीचे कैसे लाएंगे तो प्रशिक्षण ले रहे एक शिक्षक ने कहा कि मास्टर साहब पेड़ के नीचे एक मुर्गी रख देंगे तो वह वापस आ जायेगा , इस पर जमकर ठहाके लगे । यह स्तर था बीआरसी रसड़ा पकवाइनार की आउट कम लर्निंग का । वही नगरा बीआरसी पर चल रही ट्रेनिंग के समय हम लोग पहुंचे तो जहां ट्रेनर पूरे मनोयोग से ट्रेनिंग दे रहे थे तो प्रशिक्षण ले रहे शिक्षक और शिक्षिकाएं पिन ड्राप साइलेंट की दशा में सुन रहे थे । यहां ट्रेनरों राम प्रवेश वर्मा और बृजभूषण गौतम की जितनी भी तारीफ की जाय कम होगी ।



कहां हो रहा है घोटाला
जिन प्राथमिक शिक्षकों के कंधों पर देश के नौनिहालों के भविष्य को संवारने , सच्चे और आदर्श नागरिक बनाने और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक देश का नागरिक बनाने की जिम्मेदारी है , अगर वो ही चंद घण्टो की छुट्टी के लिये बीआरसी पर आये अपने हक को छोड़ रहे है वो किस मुंह से नौनिहालों में आत्मसम्मान बचाने और हक को लेने की शिक्षा देंगे  ? आज पूरे जनपद में एक भी ट्रेनिंग सेंटर नही है जहाँ इस ट्रेनिंग के माध्यम से बीआरसी पर लूट न मची हो । प्रत्येक प्रशिक्षणार्थी लगभग 200 रुपये प्रतिदिन मिलने वाले सरकारी धन की लूट का खेल धड़ल्ले से चल रहा है लेकिन इसको रोकने वाला कोई नही । दो सौ रुपये खाने के मिलने के वावजूद पूड़ी सब्जी बुनिया , पूड़ी छोला दाल चावल पापड़ पर खुश (जो आ रहे है) और जो सिर्फ हाजिरी ही लगा रहे है वो तो प्रसन्नचित है ही । साथ ही 200 रुपये खर्च करने की बजाय अधिकतम 30 से 40 रुपये खर्च करके बीईओ और एबीआरसी तो लगभग 200 की संख्या पर लगभग 30 हजार से 2 लाख प्रतिदिन (जहां ट्रेंनिग में संख्या है वहां कम से कम 30 हजार और जहां 50 प्रतिशत भी संख्या नही आ रही है वहां कम से कम 2 लाख प्रतिदिन ) आमदनी के कारण बांसों उछल रहे है ।
 बीईओ रसड़ा का इस ट्रेंनिग में मिले सरकारी धन और ट्रेनिंग लेने वाले शिक्षकों की संख्या के सम्बंध में जबाब  सुनिये --

बीआरसी रसड़ा(पकवाइनार) पर शौचालय से सम्बंधित सवाल पर बीएसए बलिया संतोष कुमार राय ने क्या कहा , सुनिये 



नही है शौचालय की समुचित व्यवस्था
  जिस बीआरसी के जिम्मे पूरे ब्लाक के विद्यालयों पर आवश्यक सुख सुविधाओं को प्रदत्त कराने की महती जिम्मेदारी है उन्ही बीआरसी के कार्यालयों पर स्वच्छ पीने के पानी और शौचालय तक कि व्यवस्था नही है । इसी को देखकर कहा जाता है "दीपक तले अंधेरा " । नगरा बीआरसी पर तो गन्दगी के अम्बार वाला शौचालय दिख भी गया लेकिन पकवाइनार के बीआरसी पर तो एक खंडहरनुमा भवन को ही दरवाजा लगाकर महिला और पुरुष शौचालय का नाम दे दिया गया है । जिस ट्रेनिंग सेंटर पर प्रतिदिन लगभग 2 सौ पुरुष और महिला शिक्षक ट्रेनिंग ले रहे हो और उनको शुद्ध पेयजल और साफ सुथरा अगर शौचालय भी न दिया जा सका है तो यह स्वच्छ भारत मिशन और जनपद को सम्पूर्ण रूप से ओडीएफ घोषित करने के सरकारी आदेश के मुंह पर कालिख पोतने जैसा है ।
तीसरे ट्रेनिंग सत्र के समापन पर संबोधित करते हुए बीईओ नगरा लाल जी शर्मा

आमजन और प्राथमिक शिक्षकों के बीच क्यो बढ़ी है दूरियां इसको बतलाते प्राथमिक शिक्षक