बलिया : टेंडर घोटाले की योजना का बलिया एक्सप्रेस द्वारा खुलासे ने दिखाया असर : आखिरकार आ ही गया अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव , सपा के जिला पंचायत सदस्यों ने ही खोल दी अपने अध्यक्ष के खिलाफ मुहिम
आखिरकार आ ही गया अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव
सपा के जिला पंचायत सदस्यों ने ही खोल दी अपने अध्यक्ष के खिलाफ मुहिम
28 सदस्यों ने लिखित रूप से शपथ पत्र के साथ दिया डीएम को पत्रक
अपर मुख्याधिकारी और अभियंता पर कार्यवाई न होने से शासन प्रशासन की धूमिल हो रही है साख
मधुसूदन सिंह की रिपोर्ट
बलिया 27 दिसम्बर 2018 ।। भ्रष्टाचार जब सर चढ़कर बोलने लगा और बेलगाम हो गया तो अपनो ने ही अपनो के खिलाफ मुहिम शुरू कर दी । जी हां , हम बात कर रहे है जिला पंचायत बलिया में निकले सैकड़ो टेंडरों की , जिसके द्वारा पहले से हुए काम को निर्माण के लिये दिखाकर साजिशन फर्जी तरीके से भुगतान आहरण करने की साजिश का पर्दाफाश होते ही जिला पंचायत अध्यक्ष सुधीर पासवान के खिलाफ इनकी ही पार्टी के 28 जिला पंचायत सदस्यों ने मोर्चा खोलते हुए इनको हटाने के लिये डीएम को पत्रक देकर एक सप्ताह के अंदर मतदान कराने की मांग की है । जिलाधिकारी ने भी सीडीओ बलिया को इस संबंध में कार्यवाई करने के लिये आदेशित कर दिया है । लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि इतने बड़े घोटाले के पर्दाफाश होने के वावजूद अब तक न तो अपर मुख्याधिकारी(इस पद पर प्रोन्नति के खिलाफ माननीय उच्च न्यायालय में वाद लंबित) रमेश सिंह के खिलाफ ही कोई किसी उच्चाधिकारी ने कार्यवाई करने की जहमत उठाई है , न ही इन टेंडरों को जारी करने वाले निर्माण विभाग के बाबुओं के साथ ही ऐसी फर्जी इस्टीमेट प्रस्तुत करने वाले अभियंता के खिलाफ कार्यवाई न करना जिला प्रशासन की भूमिका को भी कटघरे में खड़ा कर रही है । अभी इसी माह में जिला पंचायत के सदस्यों के साथ जिला पंचायत अध्यक्ष भी टेंडर निकालने के लिये धरने पर बैठे थे तो अपर मुख्याधिकारी के नेतृत्व में दूसरी तरफ कर्मचारी धरने पर तालाबंदी करके बैठे थे । शहर कोतवाल शशिमौली पांडेय के प्रयास से अपर मुख्याधिकारी ने एक सप्ताह के अंदर टेंडर निकालने का आश्वासन दिया तब जाकर दोनो पक्षो का धरना समाप्त हुआ । जिला पंचायत सदस्यों का आरोप था कि लगभग सात आठ माह से अपने अपने क्षेत्रों में निर्माण कार्य कराने के लिये हम लोगो ने प्रपोजल दिया है लेकिन आजतक अभियंता द्वारा उसका इस्टीमेट ही नही बनाया गया है जिसके कारण निविदा नही निकल पा रही है । इनका यह भी आरोप था कि अभियंता कार्यालय आते ही नही है , अपर मुख्याधिकारी ने यह बात मानी भी की लगभग एक सप्ताह से अभियंता नही आ रहे है । ऐसे में प्रथम दृष्टया तो इन फर्जी निविदाओं के लिये अभियंता और इनकी पूरी टीम के खिलाफ अगर सुचिता कायम करनी है तो तुरंत कार्यवाई होनी चाहिये । एक बात और दिलचस्प और ध्यान देने योग्य है कि अपर मुख्याधिकारी रमेश सिंह के द्वारा कार्याधिकारी रहते हुए सिद्धार्थनगर में ओवर टेंडर किया गया था जिसकी जांच चल रही है , वही बलिया में भी ओवर टेंडर करके इन्होंने अपनी कार्यपद्धति और नियत दोनो को उजागर कर दिया है । बलिया एक्सप्रेस जहां इस टेंडर घोटाले की एक एक बात पर नजर गड़ाये हुए है , वही अपर मुख्याधिकारी के नौकरी में आने से लेकर बलिया में अपर मुख्याधिकारी बनने तक के सफर को भी अपनी राडार पर रखे हुए है । आगे पाठकों को इस पर से भी पर्दा उठाकर इनके सम्बन्ध में हैरान करने वाली जानकारियों से अवगत कराएंगा । अभी तो यही देखना है कि हार्श ट्रेडिंग के मैच में अपने ही अपनो को मात देकर कुर्सी से हटाते है या गिले शिकवे भुलाकर एकबार फिर गले मिल जाते है ।
सपा के जिला पंचायत सदस्यों ने ही खोल दी अपने अध्यक्ष के खिलाफ मुहिम
28 सदस्यों ने लिखित रूप से शपथ पत्र के साथ दिया डीएम को पत्रक
अपर मुख्याधिकारी और अभियंता पर कार्यवाई न होने से शासन प्रशासन की धूमिल हो रही है साख
मधुसूदन सिंह की रिपोर्ट
बलिया 27 दिसम्बर 2018 ।। भ्रष्टाचार जब सर चढ़कर बोलने लगा और बेलगाम हो गया तो अपनो ने ही अपनो के खिलाफ मुहिम शुरू कर दी । जी हां , हम बात कर रहे है जिला पंचायत बलिया में निकले सैकड़ो टेंडरों की , जिसके द्वारा पहले से हुए काम को निर्माण के लिये दिखाकर साजिशन फर्जी तरीके से भुगतान आहरण करने की साजिश का पर्दाफाश होते ही जिला पंचायत अध्यक्ष सुधीर पासवान के खिलाफ इनकी ही पार्टी के 28 जिला पंचायत सदस्यों ने मोर्चा खोलते हुए इनको हटाने के लिये डीएम को पत्रक देकर एक सप्ताह के अंदर मतदान कराने की मांग की है । जिलाधिकारी ने भी सीडीओ बलिया को इस संबंध में कार्यवाई करने के लिये आदेशित कर दिया है । लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि इतने बड़े घोटाले के पर्दाफाश होने के वावजूद अब तक न तो अपर मुख्याधिकारी(इस पद पर प्रोन्नति के खिलाफ माननीय उच्च न्यायालय में वाद लंबित) रमेश सिंह के खिलाफ ही कोई किसी उच्चाधिकारी ने कार्यवाई करने की जहमत उठाई है , न ही इन टेंडरों को जारी करने वाले निर्माण विभाग के बाबुओं के साथ ही ऐसी फर्जी इस्टीमेट प्रस्तुत करने वाले अभियंता के खिलाफ कार्यवाई न करना जिला प्रशासन की भूमिका को भी कटघरे में खड़ा कर रही है । अभी इसी माह में जिला पंचायत के सदस्यों के साथ जिला पंचायत अध्यक्ष भी टेंडर निकालने के लिये धरने पर बैठे थे तो अपर मुख्याधिकारी के नेतृत्व में दूसरी तरफ कर्मचारी धरने पर तालाबंदी करके बैठे थे । शहर कोतवाल शशिमौली पांडेय के प्रयास से अपर मुख्याधिकारी ने एक सप्ताह के अंदर टेंडर निकालने का आश्वासन दिया तब जाकर दोनो पक्षो का धरना समाप्त हुआ । जिला पंचायत सदस्यों का आरोप था कि लगभग सात आठ माह से अपने अपने क्षेत्रों में निर्माण कार्य कराने के लिये हम लोगो ने प्रपोजल दिया है लेकिन आजतक अभियंता द्वारा उसका इस्टीमेट ही नही बनाया गया है जिसके कारण निविदा नही निकल पा रही है । इनका यह भी आरोप था कि अभियंता कार्यालय आते ही नही है , अपर मुख्याधिकारी ने यह बात मानी भी की लगभग एक सप्ताह से अभियंता नही आ रहे है । ऐसे में प्रथम दृष्टया तो इन फर्जी निविदाओं के लिये अभियंता और इनकी पूरी टीम के खिलाफ अगर सुचिता कायम करनी है तो तुरंत कार्यवाई होनी चाहिये । एक बात और दिलचस्प और ध्यान देने योग्य है कि अपर मुख्याधिकारी रमेश सिंह के द्वारा कार्याधिकारी रहते हुए सिद्धार्थनगर में ओवर टेंडर किया गया था जिसकी जांच चल रही है , वही बलिया में भी ओवर टेंडर करके इन्होंने अपनी कार्यपद्धति और नियत दोनो को उजागर कर दिया है । बलिया एक्सप्रेस जहां इस टेंडर घोटाले की एक एक बात पर नजर गड़ाये हुए है , वही अपर मुख्याधिकारी के नौकरी में आने से लेकर बलिया में अपर मुख्याधिकारी बनने तक के सफर को भी अपनी राडार पर रखे हुए है । आगे पाठकों को इस पर से भी पर्दा उठाकर इनके सम्बन्ध में हैरान करने वाली जानकारियों से अवगत कराएंगा । अभी तो यही देखना है कि हार्श ट्रेडिंग के मैच में अपने ही अपनो को मात देकर कुर्सी से हटाते है या गिले शिकवे भुलाकर एकबार फिर गले मिल जाते है ।

