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नोटबन्दी के दो साल बाद भी पीएम की कैशलेश ट्रांजेक्शन योजना असफल , 2016 के मुकाबले 2018 में 9.5 प्रतिशत ज्यादे हुआ कैश ट्रांजेक्शन





8 नवम्बर 2018 ।।

आज पीएम मोदी द्वारा की गयी नोटबन्दी की दूसरी सालगिरह है । 2016 में इस दिन प्रधानमंत्री मोदी ने
 500 और 1000 रुपए के नोटों को तत्काल प्रभाव
 से चलन से बहार कर दिया था. उस वक्त बाजार में
 चल रही कुल करेंसी का 86 फीसदी हिस्सा 500-
1000 रुपए के नोट थे. नोटबंदी लागू करने का 
मकसद कैश के कम इस्तेमाल को बढ़ावा देना है
 और ब्लैक मनी को रोकना था ।

हालांकि, अब दो साल बाद भी ऐसा लगता है
 कि इस मकसद को हासिल नहीं किया जा 
सका । रिजर्व बैंक की ओर से जारी डेटा के
 मुताबिक, 26 अक्टूबर 2018 तक बाजार में 
करेंसी का चलन बढ़कर कुल 19.6 लाख करोड़
 रुपये हो गया, जोकि दो साल पहले के मुकाबले 
9.5 पर्सेंट ज्यादा है । नोटबंदी को लागू करने के
 हफ्ते भर पहले यानी 4 नवंबर 2016 को बाजार 
में कुल 17.9 लाख करोड़ रुपये की करेंसी ही
 चलन में थी ।
बाजार में कैश के पूरी तरह लौटते ही एटीएम से पैसे 
की निकासी में उछाल आया । आरबीआई के 
आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त 2018 में एटीएम
 से कैश विदड्रॉल 2.75 लाख करोड़ रुपये था ।
यह अक्टूबर 2016 में 2.54 लाख करोड़ रुपये 
की नकद निकासी के मुकाबले 8 पर्सेंट ज्यादा था ।
 अक्टूबर 2018 में एटीएम से कितना पैसा निकाला
 गया, इसके आंकड़े दिसंबर में आएंगे ।

नोटबंदी हो जाने के एक महीने बाद एटीएम से धन 
निकासी में तेज गिरावट हुई. दिसंबर 2016 में महज
 1.06 लाख करोड़ रुपये ही एटीएम से निकाले गए ।
एक दिलचस्प बात जो सामने आई है वह है कि एटीएम
 से ज्यादा कैश विदड्रॉल होने के बावजूद देश में नए 
एटीएम की संख्या उस रफ्तार से नहीं बढ़ी ।

बीते दो साल में तकरीबन 8 हजार नए एटीएम ही लगे,
 वहीं मोबाइल बैंकिंग के जरिए पैसे के लेनदेन में भी
 जबर्दस्त उछाल आया है. अगस्त 2018 में मोबाइल
 बैंकिंग के जरिए 2.06 लाख करोड़ रुपये का ट्रांजेक्शन
 हुआ जोकि अक्टूबर 2016 के 1.13 लाख करोड़ 
रुपये के मुकाबले 82 प्रतिशत ज्यादा है ।