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अमित शाह ने लॉ कमीशन को चिट्ठी लिख कहा - एक देश एक चुनाव से बचेगा देश का खर्च



    13 अगस्त 2018 ।।
    भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने 'वन नेशन वन इलेक्शन' यानी राज्यों की विधानसभा और लोकसभा चुनाव एक साथ कराने को लेकर  लॉ कमीशन को चिट्ठी लिखी है. अमित शाह ने 'एक देश-एक चुनाव' का समर्थन करते हुए कहा कि चुनावों में होने वाले भारी खर्च से बचने के लिए ऐसा करना आने वाले समय की जरूरत है ।
    लॉ कमीशन को भेजी गई चिट्ठी में शाह ने लिखा- 'देश में मौजूदा समय में कहीं न कहीं चुनाव होते रहते हैं. इसके चलते न सिर्फ राज्य सरकारों, बल्कि केंद्र सरकार के विकास कार्य भी रुक जाते हैं. बार-बार चुनाव से काफी पैसा भी खर्च होता है. प्रशासन पर भी बोझ पड़ता है. इसे कम कराने के लिए देश में एक चुनाव की जरूरत है.'।

    बता दें कि एक देश एक चुनाव पर बीते साल नीति आयोग ने 2024 से दो चरणों में लोकसभा और विधानसभा चुनाव कराने की सलाह दी थी ।
    शाह ने लिखा, 'महाराष्ट्र में 2016-17 के दौरान 365 दिनों में विभिन्न चुनावों के चलते 307 दिन तक कोई न कोई क्षेत्र कोड ऑफ कंडक्ट के अधीन रहा. इसी तरह 2014 में कोड ऑफ कंडक्ट लगने की वजह से प्रशासनिक और विकास कार्य कई महीने तक प्रभावित रहे.'
    बीजेपी अध्यक्ष ने कहा, 'भारत में पहले भी समकालिक चुनाव होते रहे हैं. यह भारत के लिए नई बात नहीं है. 1951-52 में भारत में तत्कालीन समस्याओं के बावजूद लोकसभा और सभी विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराए गए थे. इसी तरह 1957, 1962 और 1967 में भी इस व्यवस्था के तहते चुनाव हुए.' उन्होंने कहा, 'हालांकि 1968 और 1969 में नए राज्यों के गठन के चलते यह नहीं हो पाया था. इसके बाद 1970 में लोकसभा समय से पहले भंग हो गई, तब से ही यह प्रक्रिया रुक गई.'

    बता दें कि लोकसभा और विधानसभा चुनाव साथ कराने के लिए लॉ कमीशन ने ड्राफ्ट तैयार किया है. इस पर चर्चा के लिए कमीशन ने जुलाई में राजनीतिक पार्टियों की बैठक बुलाई थी. एनडीए के दो सहयोगी समेत 5 दलों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया था, जबकि 9 दल इसके विरोध में थे.

    लॉ कमीशन के प्रस्ताव का समर्थन करने वालों में जेडीयू और अकाली दल (एनडीए), एआईएडीएमके, समाजवादी पार्टी और तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) शामिल थे. वहीं, तृणमूल कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, तेलुगू देशम पार्टी, डीएमके, जेडीएस, एआईएफबी, सीपीएम, एआईडीयूएफ, गोवा फॉरवर्ड पार्टी ने इसका विरोध किया था. हालांकि, कांग्रेस ने इस पर कोई राय नहीं रखी थी ।