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गोरखपुर में 14 सितंबर को नेहा बोरा का मुख्यमंत्री योगी पर दिया गया बयान वायरल,नेहा बोरा ने अपशब्दों से सीएम को नवाज़ा

 



छात्र-युवा जुटान, शिक्षा और रोजगार के सवालों के बीच नेहा बोरा के बयान पर भी चर्चा

गोरखपुर, 15 सितंबर।। गोरखपुर में सोमवार, 14 सितंबर को अखिल भारतीय छात्र संघ की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा के नेतृत्व में छात्र-युवा जुटान का आयोजन किया गया। सिविल लाइंस स्थित गोकुल अतिथि भवन में दोपहर 12 बजे प्रस्तावित इस कार्यक्रम में शिक्षा, रोजगार, छात्रवृत्ति, छात्रावास, विश्वविद्यालयों की सुविधाओं, भर्ती परीक्षाओं और प्रश्नपत्र लीक जैसे मुद्दे प्रमुखता से उठाए गए। कार्यक्रम में छात्र नेताओं, युवा कार्यकर्ताओं और संगठन से जुड़े लोगों की मौजूदगी रही। आयोजन स्थल के आसपास सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए पुलिस बल भी तैनात किया गया था।


यह कार्यक्रम उत्तर प्रदेश में चल रही छात्र-युवा यात्रा का हिस्सा था। प्रयागराज से शुरू हुई यात्रा वाराणसी और आजमगढ़ होते हुए 14 सितंबर को गोरखपुर पहुंची। संगठन की ओर से इस यात्रा के जरिए छात्रों और युवाओं के बीच शिक्षा, रोजगार तथा भर्ती से जुड़े सवालों को उठाया जा रहा है। संगठन का कहना है कि पढ़ाई पूरी करने के बाद रोजगार की चिंता आज बड़ी संख्या में युवाओं के सामने है और सरकारी भर्तियों में देरी ने इस परेशानी को और बढ़ाया है।


कार्यक्रम से पहले आयोजन की अनुमति को लेकर भी कुछ विवाद सामने आया था। आयोजकों का कहना था कि गोकुल अतिथि भवन की बुकिंग पहले ही करा ली गई थी और प्रशासन से अनुमति मांगी गई थी, लेकिन अनुमति प्रक्रिया में देरी हुई। संगठन ने यह भी आरोप लगाया था कि कार्यक्रम से जुड़े छात्रों पर दबाव बनाने और आयोजन स्थल को लेकर परेशानी खड़ी करने की कोशिश की गई। हालांकि इन आरोपों की प्रशासन की ओर से स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई।


14 सितंबर को कार्यक्रम स्थल पर सुरक्षा के लिए पुलिस की पर्याप्त तैनाती रही। इसके बीच कार्यक्रम हुआ और नेहा बोरा ने छात्रों की समस्याओं को लेकर अपना पक्ष रखा। छात्रों ने अपनी समस्याओं से संबंधित पत्र भी उन्हें सौंपे। इनमें शिक्षा व्यवस्था, छात्रवृत्ति, छात्रावास और विश्वविद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दे शामिल थे।


अपने संबोधन में नेहा बोरा ने कहा कि छात्रों के सवाल केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं हैं। पढ़ाई के बाद रोजगार, सरकारी भर्तियों में देरी, प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता, छात्रवृत्ति और छात्रावास जैसी समस्याएं भी युवाओं के भविष्य से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने विश्वविद्यालयों में पर्याप्त छात्रावास नहीं होने, छात्राओं के लिए छात्रावासों की कमी और सरकारी शिक्षण संस्थानों के बजट से जुड़े सवाल भी उठाए।


उन्होंने शिक्षक भर्ती और प्रतियोगी परीक्षाओं में देरी का मुद्दा भी उठाया। लंबे समय से खाली पड़े पदों को भरने और भर्ती प्रक्रिया को समयबद्ध करने की मांग की गई। यात्रा के दौरान 60 हजार शिक्षक पदों पर भर्ती की मांग भी उठाई गई थी। इसके साथ ही प्रश्नपत्र लीक की घटनाओं और परीक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की गई।



शिक्षा के निजीकरण को लेकर भी नेहा बोरा ने सरकार पर सवाल उठाए। उनका आरोप था कि सरकारी शिक्षण संस्थानों में पर्याप्त संसाधन और सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने का असर सीधे छात्रों पर पड़ रहा है। उन्होंने विश्वविद्यालयों में पर्याप्त शिक्षक, छात्रावास और अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की।


भाषण के दौरान मामला प्रदेश की राजनीति तक भी पहुंचा। नेहा बोरा ने सरकार की शिक्षा और रोजगार नीति के साथ बुलडोजर कार्रवाई तथा सांप्रदायिक राजनीति को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि छात्रों को अपने अधिकारों और भविष्य से जुड़े सवालों पर सरकार से जवाब मांगना चाहिए। उन्होंने छात्र आंदोलनों को लोकतांत्रिक अधिकारों की लड़ाई बताते हुए युवाओं से अपने सवालों को मजबूती से उठाने की अपील की।


इसी दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेकर दिए गए उनके कुछ बयान चर्चा में आ गए। 14 सितंबर के कार्यक्रम की एक वीडियो क्लिप अगले दिन सामाजिक माध्यमों पर तेजी से प्रसारित हुई। इस क्लिप के साथ मुख्यमंत्री के लिए ‘गुंडा’, ‘दंगाई’ और ‘लंपट’ जैसे शब्दों वाला कथन प्रसारित किया गया। वीडियो को लेकर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। स्थानीय रिपोर्टों में उनके भाषण के दौरान तीखे शब्दों के इस्तेमाल का उल्लेख है, हालांकि पूरे भाषण की शब्दशः पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इसलिए प्रसारित अंश को उसके पूरे संदर्भ के साथ देखना जरूरी है।


बयान को लेकर विवाद बढ़ने के बाद नेहा बोरा ने अपने रुख का बचाव किया। उनका कहना था कि उन्होंने सरकार की नीतियों और मुख्यमंत्री की राजनीति को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने अपने बयान को राजनीतिक आलोचना का हिस्सा बताया।


15 सितंबर को मामले ने एक और मोड़ लिया, जब अन्य पिछड़ा वर्ग पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष काली शंकर यादववंशी की ओर से कैंट थाने में शिकायत देकर नेहा बोरा के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि 14 सितंबर को गोरखपुर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री के खिलाफ अनुचित भाषा का इस्तेमाल किया गया। शिकायतकर्ता ने पुलिस से जांच और कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार मामला शिकायत या तहरीर के स्तर पर है और प्राथमिकी दर्ज होने की पुष्टि नहीं हुई है।


मामले पर प्रदेश सरकार के मंत्री नरेंद्र कश्यप ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने मुख्यमंत्री और अन्य नेताओं के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा के इस्तेमाल की आलोचना की। उन्होंने सामाजिक माध्यमों पर प्रसारित कृत्रिम बुद्धिमत्ता से बनाए गए कुछ कथित वीडियो का भी जिक्र किया। वहीं मंत्री अनिल राजभर ने भी नेहा बोरा के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए उनकी भाषा पर सवाल उठाए।


गोरखपुर का 14 सितंबर का यह कार्यक्रम इसलिए चर्चा में रहा कि मंच पर एक ओर छात्रों और युवाओं से जुड़े वास्तविक सवाल उठाए गए, तो दूसरी ओर भाषण के राजनीतिक हिस्से ने कार्यक्रम को विवाद की ओर भी खींच दिया। शिक्षा, रोजगार, भर्ती, छात्रवृत्ति और छात्रावास जैसे मुद्दे जहां कार्यक्रम के केंद्र में रहे, वहीं मुख्यमंत्री को लेकर सामने आई वीडियो क्लिप ने अगले दिन राजनीतिक चर्चा को और तेज कर दिया।


फिलहाल इस पूरे मामले में दो पहलू साफ दिखाई दे रहे हैं। एक तरफ छात्र संगठन शिक्षा, रोजगार और भर्ती से जुड़े सवालों को लेकर अपना अभियान आगे बढ़ा रहा है, तो दूसरी तरफ गोरखपुर में 14 सितंबर को दिए गए बयान को लेकर शिकायत और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ चुकी हैं। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस विवाद के बीच छात्र-युवा मुद्दे अभियान की प्राथमिकता बने रहते हैं या राजनीतिक बयानबाजी ही इसकी मुख्य चर्चा बनती है।