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बलिया : दुर्व्यवस्थाओं को लेकर सपा नेताओं ने बलिया नगरपालिका अध्यक्ष के खिलाफ खोला मोर्चा , मांगा इस्तीफा , 42 लाख रुपये प्रतिमाह खर्च होने के वावजूद शहर में फैली गंदगी बनी वजह 11 वार्डो की ही सफाई पर खर्च होता है लगभग 34 लाख ,आर्यन कम्पनी करती है सफाई ,शेष 14 वार्ड सरकारी कर्मियों के भरोसे

बलिया : दुर्व्यवस्थाओं को लेकर सपा नेताओं ने बलिया नगरपालिका अध्यक्ष के खिलाफ खोला मोर्चा ,  मांगा इस्तीफा , 42 लाख रुपये प्रतिमाह खर्च होने के वावजूद शहर में फैली गंदगी बनी वजह
11 वार्डो की ही सफाई पर खर्च होता है लगभग 34  लाख ,आर्यन कम्पनी करती है सफाई ,शेष 14 वार्ड सरकारी कर्मियों के भरोसे 




बलिया 12 फरवरी 2019 ।। सोमवार को शहर में व्याप्त गंदगी , जाम नालियों के चलते जगह जगह जल भराव , गलियों की बदहाल सड़को , मच्छरों के बढ़ते प्रकोप आदि समस्याओं को लेकर समाजवादी पार्टी के सैकड़ो कार्यकर्ताओ ने नगर पालिका परिषद के कार्यालय पर प्रदर्शन कर नगर में व्याप्त गन्दगी को साफ कराने में विफल चेयरमैन अजय कुमार समाजसेवी का इस्तीफा मांगा । प्रदर्शनकारी बहुत देर तक ईओ डीके विश्वकर्मा से अध्यक्ष को बुलाने की मांग करते रहे लेकिन ईओ के बार बार फोन करने के वावजूद चेयरमैन ने फोन नही उठाया । नाराज सपा नेताओं ने चेयरमैन के इस्तीफे की मांग करते हुए चेयरमैन और ईओ को पति पत्नी की तरह व्यवहार करने वाला बताते हुए शहर की साफ सफाई को चौपट करने के लिये कसूरवार ठहराया ।

बता दे कि सपा नेताओं का गुस्सा उस वक्त फूट पड़ा जब नेताओं द्वारा नगरपालिका की चरमराई हुई व्यवस्थाओं को लेकर ज्ञापन पत्र के माध्यम से नगरपालिका अध्यक्ष अजय कुमार को सूचित करने उनके ऑफिस में पहुंचे जहां ताला लगा हुआ था । इस दौरान अपने ऑफिस में मौजूद अधिशासी अधिकारी दिनेश विश्वकर्मा से नेताओं की तीखी नोकझोंक हुई और नगर पालिका अध्यक्ष को बुलाने की मांग की गई पर नगरपालिका अध्यक्ष ने अधिशासी अधिकारी का फोन तक उठाना उचित नहीं समझा जिस पर नेताओं की बौखलाहट और बढ़ गई और अधिशासी अधिकारी से  नगरपालिका अध्यक्ष के इस्तीफे की मांग कर दी । इस दौरान नेताओं का यह आरोप है कि नगरपालिका अध्यक्ष व अधिशासी अधिकारी दोनों की मिलीभगत से आज नगर पालिका पूरी तरह से बेहाल है यह दोनों एक दूसरे के पति पत्नी के रूप में व्यवस्थाओं को अस्थिर करने का का काम करते हैं। नेताओं का कहना है कि नगर पालिका अध्यक्ष का एकमात्र उद्देश्य है नगरपालिका की व्यवस्थाओं को पूरी तरह से चौपट करना इसलिए इनको अपने पद पर बने रहने का नैतिक औचित्य नहीं है।
आपको बता दे कि शहर को साफ सुथरा करने के लिये नगर पालिका चेयरमैन की फेवरिट कम्पनी आर्यन ग्रुप लगा हुआ है । जिसको शहर के 11 वार्डो में साफसफाई और पूरे 25 वार्डो में फॉगिंग, ऐंटी लार्वा का छिड़काव , डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन , चूना छिड़काव के साथ ही गीले और सूखे कूड़े को अलग अलग करने के लिये लगभग 34 लाख रुपये प्रतिमाह दिया जा रहा है । वही शेष 14 वार्डो में सरकारी सफाई कर्मी कार्य कर रहे है । पहले इन्ही सरकारी कर्मचारियों से पूरे नगर की साफ सफाई करा ली जाती थी और इन्ही में से नाला गैंग बनाकर नालो की सफाई हो जाया करती थी फिर भी प्रतिमाह 12 से 13 लाख ही औसतन खर्च आता था । आज लगभग 42 लाख प्रति माह खर्च होने के वावजूद शहर गंदगी से पटा पड़ा है । सबसे बड़ा घोटाला प्रतिमाह लगभग 2 लाख का , गिला कूड़ा और सूखा कूड़ा के छांटने में हो रहा है ।










मीडिया कर्मियों द्वारा जब इस संबंध में ईओ डीके विश्वकर्मा से बातचीत की गई तो उनका क्या जबाब था सुनिये --