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बलिया पुलिस की दबंगई से स्वास्थ्य सेवाओं के चरमराने का बढ़ा खतरा, तहरीर लापरवाही की,आईओ ने लगा दी गैर इरादतन हत्या की धारा, डॉक्टर को भेजा गया जेल

 


 

मधुसूदन सिंह 

बलिया।। इधर कुछ दिनों से कुछ प्राइवेट हॉस्पिटलों मे मौत होने से पूरे जनपद मे एक राजनीति करने का हथियार लोगों के हाथों मे मिल गया है। बलिया का स्वास्थ्य विभाग भी जनपद से अप्रशिक्षित झोलाछाप चिकित्सकों पर अंकुश लगाने मे नाकाम साबित हो रहा है। सीएमओ कार्यालय से लेकर पुरुष व महिला अस्पताल के आसपास पैथलॉजी, एक्सरे, अल्ट्रासाउंड, व झोलाछाप चिकित्सकों द्वारा संचालित होते है लेकिन इन पर अंकुश नही लग पाता है।छापमारी का दिखावा तब होता है जब किसी हॉस्पिटल मे कोई मौत हो जाती है और इसको लेकर हंगामा होता है।

सीएमओ कार्यालय द्वारा पंजीकृत पूर्वांचल हॉस्पिटल मे एक महिला का ऑपरेशन के द्वारा दो मृत बच्चियों का प्रसव कराया गया। जच्चा की हालत ख़राब होने पर उसे मऊ के लिये रेफर कर दिया गया, जहां उसकी मौत हो गयी। मऊ से लौट कर बलिया वापस आने के बाद परिजनों द्वारा पूर्वांचल हॉस्पिटल पर जमकर हंगामा किया गया और चिकित्सकों पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया गया। मौके पर पहुंची कोतवाली पुलिस ने प्रबंधक डॉ चंद्रशेखर सिंह को गिरफ्तार किया गया और परिजनों से तहरीर लेकर डॉ आदित्य कुमार सिंह पर चिकित्सकीय लापरवाही मे 106(1) BNS मे मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गयी।




पीड़ित ने कहा लापरवाही, आईओ ने कहा गैर इरातन हत्या 

उपरोक्त तहरीर मे साफ लिखा है कि पीड़ित ने चिकित्सक पर इलाज मे लापरवाही का आरोप लगाया है। इस तहरीर मे कही नही लिखा है कि मेरी पत्नी की हत्या की गयी है।वह यह भी कहा है कि ऑपरेशन के द्वारा दो मृत बच्चियों को निकाला गया। साथ ही यह भी कह रहा है कि डॉक्टर ने कहा कि आपकी पत्नी को हार्ट अटैक आया है, इसको मऊ रेफर कर दिया गया है। इस तहरीर पर 13 मार्च को जो मुकदमा दर्ज हुआ 106(1) मे था। लेकिन एकाएक जांच अधिकारी का ज्ञान चक्षु खुलता है और वह मान लेते है कि यह चिकित्सकीय लापरवाही का नही बल्कि गैर इरादतन हत्या का है और उपरोक्त दफा मे बदलाव करते हुए 106(1) से 105BNS मे मुकदमा बदलते हुए डॉ आदित्य कुमार सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। जबकि डॉ आदित्य कुमार सिंह एक योग्य MBBS चिकित्सक है और जिला महिला हॉस्पिटल मे संविदा पर कार्य करते है, सूच्य हो कि चिकित्सकों पर इलाज के दौरान किसी मरीज की मौत हो जाने मौत होने पर लापरवाही का मुकदमा कायम होता है जबकि बलिया पुलिस के जाँबाज आईओ ने तहरीर से भी आगे बढ़कर गैर इरादतन हत्या की धारा लगा दी जिससे जमानत न मिल सके।
सर्वोच्च न्यायालय का साफ आदेश प्रशिक्षित चिकित्सकों पर नही लगेंगी हत्या या गैर इरादतन हत्या की दफाये 
सूच्य को सर्वोच्च न्यायालय ने इस संबंध मे स्पष्ट रूप से आदेश दे रखा है कि प्रशिक्षित चिकित्सको पर इलाज के दौरान मरीज की मौत होने पर हत्या या गैर इरादतन हत्या का मुकदमा नही दर्ज हो सकता है। मुकदमा भी तहरीर मिलते ही दर्ज नही हो सकता है बल्कि सीएमओ द्वारा गठित जांच समिति की रिपोर्ट पर ही दर्ज होगा।
लेकिन बलिया पुलिस किसी जांच रिपोर्ट या आदेश की कहां प्रतीक्षा करती है, इसको तो तहरीर मिली नही कि मुकदमा डॉक्टर के खिलाफ तुरंत दर्ज कर लेती है।

क्या डॉक्टर मारने के लिये करते है ऑपरेशन?
पूर्वांचल हॉस्पिटल और अपूर्वा हॉस्पिटल मे हुई मौतों मे बलिया पुलिस ने कई तरह के अपने रंग दिखाये है।जहां पूर्वांचल हॉस्पिटल मे पुलिस और सीएमओ द्वारा गठित जांच टीम खुद ही मान ली (तहरीर मे भी लिखा है ) कि महिला का ऑपरेशन डॉ आदित्य कुमार सिंह ने किया है जबकि कोर्ट मे डॉ सिंह के अधिवक्ताओ ने लिखित रूप से कहा कि ऑपरेशन उनके पैनल के सर्जन द्वारा किया गया। अब सवाल यह उठ रहा है कि तहरीर मे जब लापरवाही की बात पीड़ित कह रहा है तो सीएमओ द्वारा गठित जांच टीम ने गैर इरादतन हत्या किस आधार पर तय किया? क्या लाइसेंसी डॉ आदित्य सिंह ने उनके समक्ष स्वीकार किया है कि उन्ही ने ऑपरेशन किया है? यह भी सवाल उठता है कि क्या कोउ डॉक्टर किसी मरीज का इलाज मारने के लिये करता है या जिंदगी बचाने के लिये?

अपूर्वा मे सर्जन ने किया ऑपरेशन, हत्या का मुकदमा हुआ दर्ज 

वही अपूर्वा हॉस्पिटल कांड मे ऑपरेशन योग्य सर्जन द्वारा किया गया लेकिन भीड़ के दबाव मे कोतवाली पुलिस ने यहां भी बिना जांच रिपोर्ट मिले एक कदम और आगे बढ़कर हत्या करने का मुकदमा चार प्रशिक्षित चिकित्सकों पर दर्ज कर दिया। अब इसको लेकर आईएमए और नर्सिंग होम्स एसोसिएशन ने 72 घंटे का अल्टीमेटम देकर अनिश्चित कालीन बंदी का ऐलान कर दिया है। साथ ही आज सोमवार को बंदी करके ट्रेलर भी दिखा दिया।

जिला अस्पताल मे मरीजों की एकाएक बढ़ गयी संख्या 
सोमवार को नर्सिंग होम्स एसोसिएशन द्वारा सभी नर्सिंग होम्स को विरोध स्वरुप बंद कर देने से जिला अस्पताल मे एकाएक मरीजों की संख्या बढ़ गयी। जिससे गिनती के चिकित्सकों को मरीजों को देखने मे पसीने छूट गये। पहले दिन की हड़ताल मे यह दशा हुई, अगर अनिश्चितकालीन हड़ताल हो गयी तो क्या दशा होंगी सोचा जा सकता है। यह सब सीएमओ बलिया द्वारा गठित जांच टीम व बलिया पुलिस की दबंगई का परिणाम है।