धन्य है योगी सरकार के नौकरशाह :नगर पालिका बलिया के भ्रष्टाचार की शिकायतों पर कार्यवाई करने का नही है किसी के पास समय,डीएम बलिया के पास भी नही है फुर्सत
धन्य है योगी सरकार के नौकरशाह :नगर पालिका बलिया के भ्रष्टाचार की शिकायतों पर कार्यवाई करने का नही है किसी के पास समय,डीएम बलिया के पास भी नही है फुर्सत
मधुसूदन सिंह
बलिया 28 फरवरी 2019 ।। उत्तर प्रदेश में नौकरशाही किस तरह निरंकुश और स्वतंत्र है इसका प्रमाण यूपी के सीएम योगी जी के ड्रीम प्रोजेक्ट आईजीआरएस पोर्टल को बदहाल और आमजन में इसकी विश्वसनीयता समाप्त करने के प्रयास से समझा जा सकता है । शुरू शुरू में जब यह पोर्टल शुरू हुआ तो इसके द्वारा की गई शिकायतों के सही निस्तारण से जनमानस में इस पोर्टल और मुख्यमंत्री के प्रति विश्वास उतपन्न हुआ था । लेकिन जब नौकरशाहों ने इस पोर्टल के माध्यम से आने वाली शिकायतों की बाढ़ को देखा और अपनी अपनी गर्दनों पर भी तलवार लटकते देखा तो इसके माध्यम से की गई शिकायतों के फर्जी निस्तारण की रणनीति शुरू कर शिकायतकर्त्ताओ को हतोत्साहित करने का काम शुरू किये । आज आलम यह है कि इस पोर्टल के माध्यम से दी गयी शिकायतों की तय सीमा महीनों पहले बीत गयी रहती है लेकिन न तो सम्बन्धित जिले के डीएम ध्यान देते है , न ही इस पोर्टल के लिये जिम्मेदार सर्वोच्च अधिकारी अपर प्रमुख सचिव ही । अब तो माननीय मुख्यमंत्री जी को इस आशय के साथ लिखकर कि कृपया इस को पोर्टल पर मत डालियेगा , कार्यवाही कराइये , के वावजूद भी पोर्टल पर डाल कर शिकायत कर्त्ताओं की शिकायत को भी माननीय मुख्यमंत्री जी से दूर रखने का प्रयास किया जाने लगा है ।
मै यह बात दावे के साथ इस लिये कह रहा हूँ कि क्योकि 30 जनवरी को माननीय मुख्यमंत्री जी के जनता दर्शन के प्रभारी विश्वामित्र सिंह द्वारा शिकायत को जनसुनवाई पोर्टल पर डालकर 11 फरवरी तक आख्या मांगी गई थी जिसके क्रम में जिलाधिकारी बलिया ने 5 फरवरी को अधिशाषी अधिकारी नगर पालिका परिषद बलिया को प्रेषित करके अपनी जिम्मेदारी से मुक्त हो गये है और अधिशाषी अधिकारी डीके विश्वकर्मा से कोई पूंछने वाला भी नही है कि आखिर शासन से मांगी गयी आख्या को अबतक क्यो नही भेजी ? कई बार इस पोर्टल के माध्यम से और रजिस्टर्ड पत्रो के माध्यम से नगर पालिका परिषद बलिया में व्याप्त भ्रष्टाचार की शिकायत की गयी , कैसे पटल परिवर्तन के नाम पर ईओ और चेयरमैन द्वारा शासनादेशों को धत्ता बताते हुए शासन को गुमराह करने वाला पत्र भेजा गया है , की शिकायतों पर अब तक कोई कार्यवाई न होने से माननीय योगी जी की सरकार की भ्रष्टाचारमुक्त प्रशासन देने की घोषणा को कटघरे में नौकरशाह खड़ा कर रहे है । यही नही चेयरमैन और ईओ दोनो मिलकर आर्यन ग्रुप के माध्यम से सरकारी धन का बंदरबांट करने में लगे हुए है । पूरा शहर गन्दगी से भरा रह रहा है लेकिन इस ग्रुप को मात्र 11 वार्डो के लिये लगभग 35 लाख प्रतिमाह भुगतान किया जा रहा है । यही नही इस ग्रुप को उस काम के लिये भी भुगतान किया जा रहा है जो काम हो ही नही रहा है जैसे यहां कूड़ा निस्तारण के लिये कोई संयंत्र नही है , ऐसे में सभी कूड़े( गीला और सूखा) एक साथ ही शहर के दक्षिणी छोर पर फेंके जाते है लेकिन चेयरमैन और ईओ की मेहरबानी से आर्यन ग्रुप को प्रतिमाह दोनो प्रकार के कूड़ा को अलग अलग करने के लिये लगभग 1 लाख 85 हजार का भुगतान किया जा रहा है । यही नही पूरे नगर में मच्छरों का अभी से प्रकोप बढ़ गया है , इसके रोकथाम की कोई व्यवस्था नही है लेकिन आर्यन ग्रुप को प्रति माह एन्टी लार्वा के छिड़काव के लिये 55 हजार रुपये दिये जा रहे है । सरकारी सफाई कर्मियों को झाड़ू आदि के लिये प्रति माह मात्र 15 रुपये दिये जाते है जबकि आर्यन ग्रुप को इसके लिये 99 रुपये प्रति माह । यही नही ट्यूबवेल आपरेटरों/आर ओ आपरेटरों की जितनी अधिकतम संख्या चाहिये (एक पर अधिकतम तीन 8 घण्टे की ड्यूटी के लिये) उससे कई गुना आपरेटरों के नाम पर भुगतान हो रहा है । सबसे दिलचस्प बात यह है कि आपरेटरों की सप्लाई करने वाली ग्लोबल ग्रुप ने चेयरमैन के साथ दिनरात रहने वाले लगभग एक दर्जन व्यक्तियों को भी आपरेटर बताकर भुगतान करा रही है । अभी नगर पालिका बलिया में ढेर सारे भ्रष्टाचार के किस्से है लेकिन ये तभी पकड़ में आएंगे जब लखनऊ के उच्चाधिकारी संज्ञान में लेकर बाहर की टीम से जांच कराएंगे । बलिया के जिलाधिकारी महोदय के पास बहुत ज्यादे काम है , इनके भरोसे रहने पर जांच में देरी हो सकती है । अब देखना है कि इस समाचार के प्रकाशन के बाद नौकरशाही हरकत में आती है कि पहले की तरह ही सरकार को बदनाम करने के लिये ठंडे बस्ते में डाल देती है ।
मधुसूदन सिंह
बलिया 28 फरवरी 2019 ।। उत्तर प्रदेश में नौकरशाही किस तरह निरंकुश और स्वतंत्र है इसका प्रमाण यूपी के सीएम योगी जी के ड्रीम प्रोजेक्ट आईजीआरएस पोर्टल को बदहाल और आमजन में इसकी विश्वसनीयता समाप्त करने के प्रयास से समझा जा सकता है । शुरू शुरू में जब यह पोर्टल शुरू हुआ तो इसके द्वारा की गई शिकायतों के सही निस्तारण से जनमानस में इस पोर्टल और मुख्यमंत्री के प्रति विश्वास उतपन्न हुआ था । लेकिन जब नौकरशाहों ने इस पोर्टल के माध्यम से आने वाली शिकायतों की बाढ़ को देखा और अपनी अपनी गर्दनों पर भी तलवार लटकते देखा तो इसके माध्यम से की गई शिकायतों के फर्जी निस्तारण की रणनीति शुरू कर शिकायतकर्त्ताओ को हतोत्साहित करने का काम शुरू किये । आज आलम यह है कि इस पोर्टल के माध्यम से दी गयी शिकायतों की तय सीमा महीनों पहले बीत गयी रहती है लेकिन न तो सम्बन्धित जिले के डीएम ध्यान देते है , न ही इस पोर्टल के लिये जिम्मेदार सर्वोच्च अधिकारी अपर प्रमुख सचिव ही । अब तो माननीय मुख्यमंत्री जी को इस आशय के साथ लिखकर कि कृपया इस को पोर्टल पर मत डालियेगा , कार्यवाही कराइये , के वावजूद भी पोर्टल पर डाल कर शिकायत कर्त्ताओं की शिकायत को भी माननीय मुख्यमंत्री जी से दूर रखने का प्रयास किया जाने लगा है ।




