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बलिया : नकल के खेल में डीआईओएस और एडीआईओएस की भूमिका की भी हो जांच, नाक के नीचे चलता रहा रैकेट इसकी भनक न लगना ,पैदा कर रहा है संदेह , परीक्षा केंद्र निर्धारण से ही शुरू होता है खेल

नकल के खेल में डीआईओएस और एडीआईओएस की भूमिका की भी हो जांच,
नाक के नीचे चलता रहा रैकेट इसकी भनक न लगना ,पैदा कर रहा है संदेह , परीक्षा केंद्र निर्धारण से ही शुरू होता है खेल
मधुसूदन सिंह

बलिया 27 फरवरी 2019 ।। जनपद की माध्यमिक शिक्षा जिनके हाथो में हो और वो ही इसको बर्बाद करने पर लगे हो या यूं कहें कि गुलशन का मालिक ही गुलशन के दुश्मनों के साथ मिलकर तबाह करने की योजना बनाता ही न हो बल्कि कार्यान्वित भी करे तो क्या कह सकते है । यही हाल बलिया जनपद में माध्यमिक शिक्षा का है । बलिया का जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय शिक्षा माफियाओ का अड्डा बन गया है । इस कार्यालय के सामने कई दर्जन अध्यापक/प्रिंसिपल बिना किसी काम के दिनभर जमे रहते है । इनसे सवाल करने वाला भी कोई अधिकारी नही है । यही लोग है जो इस कार्यालय से सेटिंग कर के पहले सेंटर बनवाते है और फिर नकल का खेल । बोर्ड परीक्षा में कौन विद्यालय केंद्र बनेगा ,कौन नही बनेगा , इसका निर्णय एडीआईओएस अतुल तिवारी देखते है । श्री तिवारी के आदेश पर ही परीक्षा केंद्र की सूची बनती है जिसको जिला विद्यालय निरीक्षक अपनी संस्तुति करके जिलाधिकारी को भेजते है जहां से शासन को चली जाती है । इस बार सूत्रों की माने तो अतुल तिवारी की कृपा से बहुत से पिछले साल के नकल कराने के आरोप में डिबार विद्यालय भी परीक्षा केंद्र बनाये गये है । अब जब एसटीएफ की टीम ने जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय के दो कर्मी अमरनाथ यादव पुत्र रामदेव यादव सम्बद्ध कर्मचारी जिला विद्यालय निरीक्षक बलिया  (टीचर/जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय से सम्बद्ध) , जय नरायन यादव पुत्र चन्द्रबली यादव सम्बद्ध कर्मचारी जिला विद्यालय निरीक्षक बलिया(परिचारक)नकल माफियाओ के साथ पकड़े गये है तो यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या यह जिला विद्यालय निरीक्षक और एडीआईओएस अतुल तिवारी को इसकी भनक तक न लगी  होगी ? अगर भनक नही लगी है तो ये दोनों लोग जनपद स्तरीय दायित्व निर्वहन करने के लायक ही नही है ? या अगर भनक लगने के बाद भी कार्यवाई नही किये है तो निश्चित रूप से इन दोनों अधिकारियों भाष्कर मिश्र और अतुल तिवारी की भूमिका हो सकती है , एसटीएफ टीम को इस संबंध में भी जांच करनी चाहिए । क्योकि परीक्षा के दौरान जांच में डीआईओएस भाष्कर मिश्र को एक भी  विद्यालय डिबार करने लायक नही मिला जबकि संयुक्त निदेशक रामशरण सिंह ने प्रत्येक पेपर में किसी न किसी विद्यालय को नकल कराने के आरोप में पकड़कर कार्यवाई की है । ऐसे में सवाल तो भाष्कर मिश्र और अतुल तिवारी पर उठ ही रहा है कि कही नकल के खेल में ये लोग भी तो शामिल नही है ?